बिहार बजट 2026: 3.47 लाख करोड़ के साथ विकास की नई उड़ान, लेकिन भ्रष्टाचार का साया
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बिहार की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। 2024-25 में विकास दर 14.9 प्रतिशत थी और 2025-26 में 22 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
बिहार सरकार ने 3 फरवरी 2026 को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो पिछले वर्ष के 3.17 लाख करोड़ रुपये के बजट से करीब 30,000 करोड़ रुपये अधिक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का यह पहला पूर्ण बजट है।
वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मात्र 12 मिनट में बजट भाषण समाप्त किया, जिसमें सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए 7,724 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
यह बजट राज्य के विकास को "विकसित बिहार" की ओर ले जाने का दावा करता है, लेकिन पिछले बजट की खर्च प्रक्रिया और भ्रष्टाचार के मामलों को देखते हुए इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
यह बजट समाज के हर हिस्से को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं और गरीबों के लिए कई योजनाएं हैं।
पिछले साल (2025-26) का बजट 3.17 लाख करोड़ था। उसमें शिक्षा को सबसे ज्यादा पैसा मिला था (करीब 59 हजार करोड़)। इस बार कुल बजट बढ़ा है, तो शिक्षा, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, सड़क आदि सबमें ज्यादा पैसा आएगा। लेकिन सही आंकड़े अभी पूरी तरह से सामने नहीं आए हैं।
2025 में बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई। विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (वीआईबी) के अनुसार, 122 एफआईआर दर्ज किए गए, जो 25 वर्षीय औसत (73) से दोगुना है। इनमें 101 रिश्वतखोरी के मामले हैं, और 37.8 लाख रुपये की रिश्वत बरामद हुई। अदालतों ने 29 मामलों में फैसले सुनाए।
बिहार की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। पिछले साल विकास दर 14.9% थी। इस साल 22% तक पहुंच सकती है। सरकार की अपनी कमाई (टैक्स) 65 हजार करोड़ से ज्यादा होने का लक्ष्य है।