बिहार की आपदाओं से मौतें देश में सबसे ज्यादा हैं, जो रोकथाम की कमी को दर्शाती हैं।
बिहार राज्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों का आंकड़ा देश में सबसे बड़ा है। राज्य सरकार की आर्थिक सर्वे रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, इस साल विभिन्न आपदाओं में 2,547 लोगों की मौत हुई है। यह संख्या पिछले साल 2023-24 के 2,140 मौतों से ज्यादा है। औसतन हर दिन 7 लोगों की जान गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार की भौगोलिक स्थिति, नदियों का जाल और ग्रामीण आबादी की वजह से यहां मौतों की संख्या ज्यादा है।
आपदाओं से मौतों का विवरण
आर्थिक सर्वे रिपोर्ट में बताए गए मौतों के मुख्य कारण:
- डूबने से मौतें: सबसे ज्यादा 2,039 मौतें डूबने से हुईं, जो कुल मौतों का लगभग 80% है। ये मौतें नदियों, तालाबों, नहरों और बाढ़ के पानी में हुईं।
- बिजली गिरने से: 305 मौतें, जो पिछले साल के 242 से ज्यादा हैं। इसके अलावा 29 लोग घायल हुए, जबकि पिछले साल 35 घायल थे।
- आग लगने से: 143 मौतें, पिछले साल के 118 से 25 ज्यादा।
- लू (हीटवेव) से: 34 मौतें, जो पिछले साल के 12 से तीन गुना ज्यादा हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार के ज्यादातर जिले बहु-खतरों वाले हैं, जहां बाढ़, सूखा, भूकंप, चक्रवात और आग जैसी आपदाएं आम हैं। दक्षिण-मध्य और दक्षिण-पूर्वी बिहार में बाढ़ और तूफान से डूबने और बिजली गिरने की घटनाएं ज्यादा होती हैं।
देश के स्तर पर बिहार की स्थिति
केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) की रिपोर्ट EnviStats India 2025 के अनुसार, पूरे भारत में 2024-25 में प्राकृतिक आपदाओं से 3,080 मौतें हुईं, जो 11 सालों में सबसे ज्यादा है। अगर बिहार के 2,547 मौतों की तुलना करें, तो यह देश की कुल मौतों का 80% से ज्यादा है। हालांकि, राज्य और राष्ट्रीय आंकड़ों में वर्गीकरण का अंतर है – राष्ट्रीय आंकड़े मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं पर केंद्रित हैं, जबकि बिहार की रिपोर्ट में आग और डूबने जैसी घटनाओं को भी शामिल किया गया है।
ऐतिहासिक आंकड़ों से पता चलता है कि बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्य बिजली गिरने और बाढ़ से मौतों में शीर्ष पर रहते हैं। 2023 में पूरे देश में बिजली गिरने से 2,560 मौतें हुईं, और बिहार इसमें प्रमुख राज्य था।
मौतों के मुख्य कारण
विशेषज्ञों और सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार में मौतों की ज्यादा संख्या के पीछे ये कारण हैं:
- भौगोलिक स्थिति: राज्य का 73% क्षेत्र बाढ़-प्रवण है। गंगा और कोसी जैसी नदियां हर साल बाढ़ लाती हैं, जिससे डूबने की घटनाएं बढ़ती हैं।
- मौसमी बदलाव: मानसून से पहले और दौरान तूफान और बिजली गिरने की घटनाएं ज्यादा होती हैं।
- ग्रामीण आबादी: बिहार की आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण है और खेती में लगा है, जो बाहर काम करने से खतरे में रहता है।
- सुरक्षा की कमी: पानी के स्रोतों पर बाड़, चेतावनी बोर्ड और जागरूकता की कमी से मौतें बढ़ती हैं।
बिहार की अनुमानित आबादी 2025 में 13.1 करोड़ (131 मिलियन) है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 9% है। बिहार में आपातकालीन कर्मचारियों की संख्या आबादी के मुकाबले बहुत कम है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की कुल संख्या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन हालिया भर्ती में 118 पदों की अधिसूचना जारी हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर 'आपदा मित्र' योजना के तहत 1 लाख स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, और बिहार के कई जिलों में 300-300 स्वयंसेवक प्रशिक्षित हो रहे हैं। अनुमानित रूप से बिहार में लगभग 9,000 आपदा मित्र और 2,000 सिविल डिफेंस स्वयंसेवक हैं, जो कुल आबादी का 0.008% है।
पुलिस बल की वास्तविक संख्या लगभग 1.10 लाख है, जो आपदाओं में मदद करता है, लेकिन यह आबादी का सिर्फ 0.08% है। ये आंकड़े एनडीएमए की वेबसाइट और सरकारी अधिसूचनाओं से लिए गए हैं।
सरकार की योजनाएं और तैयारी
बिहार सरकार आपदाओं से निपटने के लिए कई कदम उठा रही है:
- जागरूकता अभियान: बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) पूरे राज्य में जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है। स्कूलों में छात्रों को आपदा तैयारी सिखाई जाएगी।
- आपातकालीन केंद्रों का विस्तार: 20 जिलों में नए जिला आपातकालीन प्रतिक्रिया और प्रशिक्षण केंद्र बनाए जा रहे हैं। SDRF का मुख्यालय बिहटा में बनाया गया है।
- अर्ली वॉर्निंग सिस्टम: मौसम अलर्ट और चेतावनी सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।
- समुदाय स्तर पर प्रशिक्षण: गांवों में स्वयंसेवकों को प्राथमिक चिकित्सा और बचाव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- राहत: प्रभावित परिवारों को 7,000 रुपये की अनुग्रह राशि दी जा रही है। 2025-26 में बाढ़ प्रभावितों को 680 करोड़ रुपये की राहत दी गई।
इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह ने हाल ही में कहा, "बिहार बाढ़, सूखा, तूफान, बिजली गिरने और चक्रवात जैसी आपदाओं से प्रभावित है। सरकार आपदा प्रबंधन और प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है। हम स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाएंगे ताकि छात्र आपदाओं से निपटना सीखें।"